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mahabharat 7.143.d7: अर्जुन ने कहा, 'उस क्षत्रिय धर्म को धिक्कार है, जहां आप जैसे दूसरों को शरण देने वाले और शरणागतों से प्रेम करने वाले राजा की ऐसी स्थिति हो गई है।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  7.143.d7 
अर्जुन उवाच
धिगस्तु क्षत्रधर्मं तु यत्र त्वं पुरुषेश्वर:।
अवस्थामीदृशीं प्राप्त: शरण्य: शरणप्रद:।
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा, 'उस क्षत्रिय धर्म को धिक्कार है, जहां आप जैसे दूसरों को शरण देने वाले और शरणागतों से प्रेम करने वाले राजा की ऐसी स्थिति हो गई है।
 
Arjun said, 'Shame on that Kshatriya Dharma, where a king like you who gives shelter to others and loves those who seek refuge has reached such a state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)