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mahabharat 7.143.65: मुझे संकट में देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए अपनी तलवार से भूरिश्रवा की भुजा काट डाली। इस कारण मैं भूरिश्रवा को मारने के यश से वंचित हो गया ॥65॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  7.143.65 
यत् तु पार्थेन मां दृष्ट्वा प्रतिज्ञामभिरक्षता।
सखड्गोऽस्य हृतो बाहुरेतेनैवास्मि वञ्चित:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
मुझे संकट में देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन ने अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए अपनी तलवार से भूरिश्रवा की भुजा काट डाली। इस कारण मैं भूरिश्रवा को मारने के यश से वंचित हो गया ॥65॥
 
Seeing me in trouble, Kunti's son Arjuna kept his promise and cut off Bhurishrava's arm along with his sword. Because of this I was deprived of the glory of killing Bhurishrava. ॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)