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mahabharat 7.143.50-51h: प्रचुर दक्षिणा देने वाला शल्क का बड़ा भाई भूरिश्रवा पूर्णतया निर्दोष था। पाण्डुपुत्र अर्जुन ने उसकी भुजा काटकर उसे मार डाला था, इसलिए उसने मृत्युपर्यन्त उपवास का संकल्प कर लिया था और ध्यान आदि कार्यों में लीन था। ऐसी स्थिति में, भुजा कट जाने के कारण सूंड कटे हाथी के समान बैठे भूरिश्रवा को सात्यकि ने मार डालने की इच्छा की।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.143.50-51h 
निहतं पाण्डुपुत्रेण प्रसक्तं भूरिदक्षिणम्।
इयेष सात्यकिर्हन्तुं शलाग्रजमकल्मषम्॥ ५०॥
निकृत्तभुजमासीनं छिन्नहस्तमिव द्विपम्।
 
 
अनुवाद
प्रचुर दक्षिणा देने वाला शल्क का बड़ा भाई भूरिश्रवा पूर्णतया निर्दोष था। पाण्डुपुत्र अर्जुन ने उसकी भुजा काटकर उसे मार डाला था, इसलिए उसने मृत्युपर्यन्त उपवास का संकल्प कर लिया था और ध्यान आदि कार्यों में लीन था। ऐसी स्थिति में, भुजा कट जाने के कारण सूंड कटे हाथी के समान बैठे भूरिश्रवा को सात्यकि ने मार डालने की इच्छा की।
 
Shalka's elder brother Bhurishrava, who gave abundant dakshina, was completely innocent. Arjuna, son of Pandu, had killed him by cutting off his arm and that is why he had resolved to fast till death and was engrossed in meditation and other activities. In that condition, Satyaki desired to kill Bhurishrava who was sitting like an elephant with its trunk cut off due to his arm being cut off. 50 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)