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mahabharat 7.143.43: हे पिता! बालक अभिमन्यु अस्त्र, कवच और रथ से रहित था। वह जिस अवस्था में मारा गया, उसकी प्रशंसा कौन धर्मात्मा पुरुष कर सकता है?॥43॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.143.43 
न्यस्तशस्त्रस्य बालस्य विरथस्य विवर्मण:।
अभिमन्योर्वधं तात धार्मिक: को नु पूजयेत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! बालक अभिमन्यु अस्त्र, कवच और रथ से रहित था। वह जिस अवस्था में मारा गया, उसकी प्रशंसा कौन धर्मात्मा पुरुष कर सकता है?॥43॥
 
O father! The child Abhimanyu was devoid of arms, armour and chariot. Which religious man can praise the condition in which he was killed? ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)