Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.143.41: युपध्वज भूरिश्रवाजी! इस बात का ध्यान करके आपको मेरी निन्दा नहीं करनी चाहिए। धर्म का स्वरूप जाने बिना दूसरों की निन्दा करना उचित नहीं है।॥41॥ | mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यूपकेतो निरीक्ष्यैतन्न मामर्हसि गर्हितुम्।
न हि धर्ममविज्ञाय युक्तं गर्हयितुं परम्॥ ४१॥
अनुवाद
युपध्वज भूरिश्रवाजी! इस बात का ध्यान करके आपको मेरी निन्दा नहीं करनी चाहिए। धर्म का स्वरूप जाने बिना दूसरों की निन्दा करना उचित नहीं है।॥41॥
Yupadhwaj Bhurishravaji! Paying attention to this, you should not criticize me. It is not right to criticize others without knowing the nature of religion. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥