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निन्द्यमानौ तथा कृष्णौ नोचतु: किंचिदप्रियम्।
तत: प्रशस्यमानश्च नाहृष्यद् यूपकेतन:॥ ३७॥
अनुवाद
उनके द्वारा निन्दा किये जाने पर भी श्रीकृष्ण और अर्जुन ने कोई अप्रिय बात नहीं कही तथा यूपकेतु द्वारा स्तुति किये जाने पर भी भूरिश्र ने प्रसन्नता प्रकट नहीं की।
Even after being condemned by them, Shri Krishna and Arjun did not say anything unpleasant and even after being praised by Yupketu Bhurishra did not express joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥