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mahabharat 7.143.30: ऐसी स्थिति में महाबली योद्धा सात्यकि को युद्ध में पराजित करने के बाद तुम यह सोचने लगे कि मैं सात्यकि से भी बड़ा योद्धा हूँ और वह मेरे पराक्रम से वशीभूत हो गया है।   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.143.30 
ईदृशं सात्यकिं संख्ये निर्जित्य च महारथम्।
अधिकत्वं विजानीषे स्ववीर्यवशमागतम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में महाबली योद्धा सात्यकि को युद्ध में पराजित करने के बाद तुम यह सोचने लगे कि मैं सात्यकि से भी बड़ा योद्धा हूँ और वह मेरे पराक्रम से वशीभूत हो गया है।
 
In such a situation, after defeating the mighty warrior Satyaki in the war you began to think that I am a greater warrior than Satyaki and that he has been subdued by my prowess.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)