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mahabharat 7.143.16-17: अर्जुन बोले - प्रभु! यह स्पष्ट है कि जैसे-जैसे मनुष्य वृद्ध होता है, उसकी बुद्धि भी वृद्ध होती जाती है। इस समय आपने जो कुछ कहा है, वह सब व्यर्थ है। आप समस्त इन्द्रियों के अधिष्ठाता भगवान श्रीकृष्ण को तथा मुझ पाण्डुपुत्र अर्जुन को भी जानते हैं, फिर भी आप हमारी निन्दा करते हैं॥ 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  7.143.16-17 
अर्जुन उवाच
व्यक्तं हि जीर्यमाणोऽपि बुद्धिं जरयते नर:॥ १६॥
अनर्थकमिदं सर्वं यत् त्वया व्याहृतं प्रभो।
जानन्नेव हृषीकेशं गर्हसे मां च पाण्डवम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - प्रभु! यह स्पष्ट है कि जैसे-जैसे मनुष्य वृद्ध होता है, उसकी बुद्धि भी वृद्ध होती जाती है। इस समय आपने जो कुछ कहा है, वह सब व्यर्थ है। आप समस्त इन्द्रियों के अधिष्ठाता भगवान श्रीकृष्ण को तथा मुझ पाण्डुपुत्र अर्जुन को भी जानते हैं, फिर भी आप हमारी निन्दा करते हैं॥ 16-17॥
 
Arjuna said - Lord! It is clear that as a man grows old, his intellect also grows old. Whatever you have said at this time is all futile. You know Lord Krishna, the controller of all the senses, and even me, Arjuna, the son of Pandu, yet you criticize us.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)