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mahabharat 7.143.15: कुन्तीपुत्र! वृष्णि और अंधक कुल के लोग कर्म भ्रष्ट हैं, हिंसात्मक कर्म करते हैं और स्वभाव से ही निन्दित हैं। फिर तुमने उन्हें प्रमाण कैसे मान लिया?॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.143.15 
व्रात्या: संक्लिष्टकर्माण: प्रकृत्यैव च गर्हिता:।
वृष्ण्यन्धका: कथं पार्थ प्रमाणं भवता कृता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र! वृष्णि और अंधक कुल के लोग कर्म भ्रष्ट हैं, हिंसात्मक कर्म करते हैं और स्वभाव से ही निन्दित हैं। फिर तुमने उन्हें प्रमाण कैसे मान लिया?॥15॥
 
Kunti's son! The people of Vrishni and Andhaka clan are corrupt in their rituals, do violent acts and are condemned by nature. Then how did you accept them as proof?॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)