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mahabharat 7.143.12: अन्यथा राजा के वंशज होकर और विशेषतः कुरुकुल में उत्पन्न होकर भी आप क्षत्रिय-धर्म से कैसे च्युत हो सकते थे? आपका चरित्र और स्वभाव तो बहुत अच्छा था और आपने उत्तम व्रतों का भी पालन किया था॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 143: भूरिश्रवाका अर्जुनको उपालम्भ देना, अर्जुनका उत्तर और आमरण अनशनके लिये बैठे हुए भूरिश्रवाका सात्यकिके द्वारा वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.143.12 
कथं हि राजवंश्यस्त्वं कौरवेयो विशेषत:।
क्षत्रधर्मादपक्रान्त: सुवृत्तश्चरितव्रत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अन्यथा राजा के वंशज होकर और विशेषतः कुरुकुल में उत्पन्न होकर भी आप क्षत्रिय-धर्म से कैसे च्युत हो सकते थे? आपका चरित्र और स्वभाव तो बहुत अच्छा था और आपने उत्तम व्रतों का भी पालन किया था॥12॥
 
Otherwise, being a descendant of a king and especially being born in the Kuru clan, how could you have fallen from the kshatriya-dharma? Your character and nature was very good and you had also followed the best vows.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)