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श्लोक 7.142.70  |
सैन्धवे सक्तदृष्टित्वान्नैनं पश्यामि माधवम्।
एतत् त्वसुकरं कर्म यादवार्थे करोम्यहम्॥ ७०॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रभु! मेरी दृष्टि सिन्धुराज जयद्रथ पर लगी हुई थी। इसीलिए मैं सात्यकि की ओर नहीं देख रहा था; किन्तु अब मैं इस वीर यदुवंशी की रक्षा के लिए यह कठिन कार्य कर रहा हूँ। ॥70॥ |
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| Lord! My eyes were fixed on Sindhuraj Jayadratha. That is why I was not looking at Satyaki; but now I am performing this difficult task to protect this brave Yaduvanshi.' ॥ 70॥ |
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