श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  7.142.68 
प्रवरं वृष्णिवीराणां यन्न हन्याद्धि सात्यकिम्।
महाद्विपमिवारण्ये मृगेन्द्र इव कर्षति॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जैसे सिंह वन में बड़े हाथी को घसीटता है, वैसे ही भूरिश्रवा वृष्णिवंश के प्रधान योद्धा सात्यकि को घसीट रहा है, परंतु उसे मार नहीं रहा है ॥68॥
 
Just as a lion drags a great elephant in the forest, similarly Bhurishrava is dragging Satyaki, the chief warrior of the Vrishni clan, but is not killing him. ॥ 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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