श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  7.142.66 
एवमुक्तो महाबाहुर्वासुदेवेन पाण्डव:।
मनसा पूजयामास भूरिश्रवसमाहवे॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के मुख से यह बात सुनकर महाबाहु पाण्डुपुत्र अर्जुन ने युद्धस्थल में मन ही मन भूरिश्रवा की प्रशंसा की।
 
On hearing this from Lord Krishna, the mighty-armed son of Pandu, Arjuna praised Bhurishrava in his mind in the battlefield.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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