श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  7.142.56-57h 
अथाब्रवीद्‍धृष्टमना वासुदेवं धनंजय:।
पश्य वृष्णिप्रवीरेण क्रीडन्तं कुरुपुङ्गवम्॥ ५६॥
महाद्विपेनेव वने मत्तेन हरियूथपम्।
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन ने प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 'प्रभो! देखो, जैसे सिंह का सेनापति वन में मतवाले हाथी के साथ क्रीड़ा करता है, उसी प्रकार कुरुकुल का युवराज भूरिश्रवा वृष्णिवंश के प्रधान वीर सात्यकि के साथ क्रीड़ा कर रहा है ॥56 1/2॥
 
Then Arjun became happy and said to Lord Krishna - 'Lord! See, just as a lion's commander plays with a drunken elephant in the forest, in the same way Bhurishrava, the crown prince of Kurukula, is playing with the brave Satyaki, the chief of the Vrishni dynasty. 56 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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