श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.142.51 
ततो भूरिश्रवा: क्रुद्ध: सात्यकिं युद्धदुर्मद:।
उद्यम्याभ्याहनद् राजन् मत्तो मत्तमिव द्विपम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इसी समय क्रोधित भूरिश्रवा ने सात्यकि पर उसी प्रकार आक्रमण किया, जैसे कोई मतवाला हाथी किसी अन्य मतवाले हाथी पर आक्रमण करता है।
 
At this very time, the furious Bhurishravana attacked Satyaki in the same manner as a drunken elephant attacks another intoxicated elephant.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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