श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.142.42 
तयो राजन् भुजाघातनिग्रहप्रग्रहास्तथा।
शिक्षाबलसमुद्भूता: सर्वयोधप्रहर्षणा:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उनकी बाहुओं के प्रहार, संयम (पकड़ना) और आलिंगन (पकड़ना) आदि क्रियाएँ उनके प्रशिक्षण और शक्ति के अनुसार हो रही थीं और समस्त योद्धाओं के आनन्द को बढ़ा रही थीं।
 
King! The attacks by their arms, restraint (grabbing) and embrace (grabbing) etc., were being performed in accordance with their training and strength and were increasing the joy of all the warriors.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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