श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  7.142.39-40 
मुहूर्तमिव राजेन्द्र समाहत्य परस्परम्।
पश्यतां सर्वसैन्यानां वीरावाश्वसतां पुन:॥ ३९॥
असिभ्यां चर्मणी चित्रे शतचन्द्रे नराधिप।
निकृत्य पुरुषव्याघ्रौ बाहुयुद्धं प्रचक्रतु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस समय विश्राम कर रही समस्त सेना के सामने ही दोनों ने लगभग दो घण्टे तक एक-दूसरे पर तलवारों से प्रहार किया और एक-दूसरे की सौ अर्धचन्द्राकार चिह्नों से सुशोभित अद्वितीय ढालों को काट डाला। हे नरदेव! फिर दोनों अपनी सिंह भुजाओं से मल्लयुद्ध करने लगे।
 
King! In front of the entire army which was resting at that time, both of them attacked each other with their swords for about two hours and cut off each other's unique shields which were decorated with hundred crescent shaped marks. O lord of men! Then both of them started wrestling with their lion arms.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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