श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.142.28-29h 
एवमुत्तमकर्माणौ कुरुवृष्णियशस्करौ॥ २८॥
परस्परमयुध्येतां वारणाविव यूथपौ।
 
 
अनुवाद
कुरुकुल और वृष्णिवंश का यश फैलाने वाले महाकर्मा भूरिश्रवा और सात्यकि इस प्रकार गजराज के दो तरुण राजाओं के समान परस्पर युद्ध करने लगे ॥28 1/2॥
 
Bhurishrava and Satyaki, the great karmas who spread the fame of Kurukula and Vrishni dynasty, thus started fighting with each other like two young kings of Gajraj. 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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