श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.142.25-26h 
तौ पृथक् शस्त्रवर्षाभ्यामवर्षेतां परस्परम्॥ २५॥
उत्तमाभिजनौ वीरौ कुरुवृष्णियशस्करौ।
 
 
अनुवाद
दोनों ही कुलीन कुलों में जन्मे थे। एक कुरुवंश का यश फैला रहा था और दूसरा वृष्णिवंश का गौरव बढ़ा रहा था। दोनों ने एक-दूसरे पर तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्र बरसाए।
 
Both of them were born in noble families. One was spreading the fame of the Kuru clan and the other was increasing the glory of the Vrishni clan. Both of them showered different weapons on each other.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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