श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.142.16 
समास्तु शाश्वतीर्हन्याद् यो मां हन्याद्धि संयुगे।
किं वृथोक्तेन बहुना कर्मणा तत् समाचर॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो मुझे युद्ध में मार सकता है, वह अपने शत्रुओं को सर्वत्र और किसी भी समय मार सकता है। अतः व्यर्थ की बातें करने से क्या लाभ? जो कहा है, वही करो॥16॥
 
He who can kill me in battle can kill his enemies everywhere and at any time. So, what is the use of talking a lot in vain? Do what you have said.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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