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श्लोक 7.142.1  |
संजय उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सात्वतं युद्धदुर्मदम्।
क्रोधाद् भूरिश्रवा राजन् सहसा समुपाद्रवत्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं- राजन! युद्ध में उन्मत्त सात्यकि को आते देख भूरिश्रवाण ने क्रोधपूर्वक सहसा उस पर आक्रमण कर दिया॥1॥ |
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| Sanjay says- Rajan! Seeing the battle-mad Satyaki coming, Bhurishravane suddenly attacked him in anger. 1॥ |
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