श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 142: भूरिश्रवा और सात्यकिका रोषपूर्वक सम्भाषण और युद्ध तथा सात्यकिका सिर काटनेके लिये उद्यत हुए भूरिश्रवाकी भुजाका अर्जुनद्वारा उच्छेद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.142.1 
संजय उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य सात्वतं युद्धदुर्मदम्।
क्रोधाद् भूरिश्रवा राजन् सहसा समुपाद्रवत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! युद्ध में उन्मत्त सात्यकि को आते देख भूरिश्रवाण ने क्रोधपूर्वक सहसा उस पर आक्रमण कर दिया॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Seeing the battle-mad Satyaki coming, Bhurishravane suddenly attacked him in anger. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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