जैसे बाज मांस पर झपटता है, वैसे ही द्रोणाचार्य प्रतिदिन धर्मराज को पकड़ना चाहते हैं। क्या राजा युधिष्ठिर सुरक्षित रहेंगे?॥36-37॥
‘Just as an eagle pounces on meat, similarly Dronacharya wants to capture Dharmaraja every day. Will King Yudhishthira be safe?’॥ 36-37॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यक्यर्जुनदर्शने एकचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकि और अर्जुनका परस्पर साक्षात्कारविषयक एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥