श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  7.141.36-37 
ग्रहणं धर्मराजस्य खग: श्येन इवामिषम्॥ ३६॥
नित्यमाशंसते द्रोण: कच्चित् स्यात् कुशली नृप:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे बाज मांस पर झपटता है, वैसे ही द्रोणाचार्य प्रतिदिन धर्मराज को पकड़ना चाहते हैं। क्या राजा युधिष्ठिर सुरक्षित रहेंगे?॥36-37॥
 
‘Just as an eagle pounces on meat, similarly Dronacharya wants to capture Dharmaraja every day. Will King Yudhishthira be safe?’॥ 36-37॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यक्यर्जुनदर्शने एकचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकि और अर्जुनका परस्पर साक्षात्कारविषयक एक सौ इकतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)