Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.141.35-36h: केशव! मैं धर्मराज के इस कार्य को विपरीत मानता हूँ, जिन्होंने द्रोणाचार्य का भय छोड़कर सात्यकि को यहाँ भेजा।   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  7.141.35-36h 
व्यतिक्रममिमं मन्ये धर्मराजस्य केशव॥ ३५॥
आचार्याद् भयमुत्सृज्य य: प्रैषयत् सात्यकिम्।
 
 
अनुवाद
केशव! मैं धर्मराज के इस कार्य को विपरीत मानता हूँ, जिन्होंने द्रोणाचार्य का भय छोड़कर सात्यकि को यहाँ भेजा।
 
Keshav! I consider this action of Dharmaraja to be contrary, who sent Satyaki here leaving aside the fear of Dronacharya. 35 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)