श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  7.141.31-32 
जयद्रथश्च हन्तव्यो लम्बते च दिवाकर:।
श्रान्तश्चैष महाबाहुरल्पप्राणश्च साम्प्रतम्॥ ३१॥
परिश्रान्ता हयाश्चास्य हययन्ता च माधव।
न च भूरिश्रवा: श्रान्त: ससहायश्च केशव॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इसके अलावा जयद्रथ का भी वध करना है। इधर सूर्यदेव अस्त हो रहे हैं। माधव! यह महाबाहु सात्यकि इस समय थककर दुर्बल हो रहा है। उसके घोड़े और सारथी भी थक गए हैं। किन्तु केशव! भूरिश्रवा और उसके सहायक थके नहीं हैं।'
 
‘Apart from this, Jayadratha also has to be killed. Here the Sun God is setting. Madhava! This Mahabahu Satyaki is getting tired and weak at this time. His horses and charioteer are also tired. But Keshav! Bhurishrava and his assistants are not tired.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)