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mahabharat 7.141.3: उन महाधनुर्धर वीरों ने अपने रथों द्वारा सात्यकि को चारों ओर से रोककर क्रोधपूर्वक उन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 7.141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.141.3 
अथैनं रथवंशेन सर्वत: संनिवार्य ते।
अवाकिरन् शरव्रातै: क्रुद्धा: परमधन्विन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन महाधनुर्धर वीरों ने अपने रथों द्वारा सात्यकि को चारों ओर से रोककर क्रोधपूर्वक उन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Blocking Satyaki from all sides with their chariots, those great archers began angrily showering arrows upon him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)