vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 141: सात्यकिका अद्भुत पराक्रम, श्रीकृष्णका अर्जुनको सात्यकिके आगमनकी सूचना देना और अर्जुनकी चिन्ता
»
श्लोक 3
श्लोक
7.141.3
अथैनं रथवंशेन सर्वत: संनिवार्य ते।
अवाकिरन् शरव्रातै: क्रुद्धा: परमधन्विन:॥ ३॥
अनुवाद
उन महाधनुर्धर वीरों ने अपने रथों द्वारा सात्यकि को चारों ओर से रोककर क्रोधपूर्वक उन पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
Blocking Satyaki from all sides with their chariots, those great archers began angrily showering arrows upon him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×