श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 14: द्रोणका पराक्रम, कौरव-पाण्डववीरोंका द्वन्द्वयुद्ध, रणनदीका वर्णन तथा अभिमन्युकी वीरता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.14.18 
निहतान् प्राणिन: संख्ये द्रोणेन बलिना रणे।
वहन्तीं पितृलोकाय शतशो राजसत्तम॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उत्तम! वह पराक्रमी द्रोणाचार्य द्वारा युद्धभूमि में मारे गए सैकड़ों प्राणियों को पितृलोक ले जा रही थी।
 
The best! She was taking hundreds of creatures killed in the battlefield by the mighty Dronacharya to the ancestral world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)