श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक d1h-99
 
 
श्लोक  7.139.d1h-99 
(सूदं त्वामहमाजाने मात्स्ये प्रेष्यककारकम्।)
सूदान् भृत्यजनान् दासांस्त्वं गृहे त्वरयन् भृशम्।
योग्यस्ताडयितुं क्रोधाद् भोजनार्थं वृकोदर॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ। तुम मत्स्यराज विराट की सेवा में रसोइया रह चुके हो। वृकोदर! तुममें क्रोधपूर्वक घर के रसोइयों, सेवकों और दासों को डाँटने और पीटने की क्षमता है, तथा उन्हें शीघ्रतापूर्वक भोजन बनाने की प्रेरणा भी देते हो॥ 99॥
 
I know you very well. You have been a cook in the service of Matsyaraj Virat. Vrikodara! You have the ability to scold and beat the cooks, servants and slaves in the house in anger while inspiring them to prepare food very quickly.॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)