श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 139: भीमसेन और कर्णका भयंकर युद्ध, पहले भीमकी और पीछे कर्णकी विजय, उसके बाद अर्जुनके बाणोंसे व्यथित होकर कर्ण और अश्वत्थामाका पलायन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.139.3 
स कर्णं कर्णिना कर्णे पीतेन निशितेन च।
विव्याध सुभृशं संख्ये तैलधौतेन मारिष॥ ३॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! फिर युद्धभूमि में उन्होंने भी कर्ण के कान पर करणी नामक बाण से गहरा घाव कर दिया, जो तीक्ष्ण, जलयुक्त तथा तेल से धुला हुआ था।
 
Honorable King! Then on the battlefield he too inflicted a deep wound on Karna's ear with an arrow called 'Karni' which was sharp and watery and washed with oil.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)