श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.137.53 
त्वत्कृते ह्यहमद्राक्षं दह्यमानां वरूथिनीम्।
सहस्रश: शरैर्मुक्तै: पाण्डवेन वृषेण च॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे कारण ही मैंने भीमसेन और कर्ण के छोड़े हुए हजारों बाणों से राजाओं की विशाल सेनाओं को भस्म होते देखा है।
 
Because of you I have seen huge armies of kings being burnt by thousands of arrows shot by Bhimasena and Karna. 53.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भीमयुद्धे सप्तत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीमसेनयुद्धविषयक एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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