श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.137.49 
त्वया वृद्धेन धीरेण कार्यतत्त्वार्थदर्शिना।
न कृतं सुहृदां वाक्यं दैवमत्र परायणम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
आप वृद्ध और धैर्यवान हैं, कार्य का सार और उद्देश्य देखते और समझते हैं, फिर भी आपने अपने हितैषी मित्रों की सलाह नहीं मानी। इसका मुख्य कारण प्रारब्ध है ॥49॥
 
You are old and patient, you see and understand the essence and purpose of the work, yet you did not listen to the advice of your well-wishing friends. The main reason behind this is destiny. ॥ 49॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas