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mahabharat 7.137.46-47: आपके पुत्रों ने उन महामनस्वी पाण्डवों को क्रोध दिलाने के लिए जो कठोर शब्द कहे थे, उनके कारण पाण्डवपुत्र भीमसेन के हृदय में तेरह वर्षों से जो क्रोध की अग्नि जल रही है, उसे भीमसेन आपके पुत्रों द्वारा बुझा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 46-47
 
 
श्लोक  7.137.46-47 
यच्च षण्ढतिलादीनि परुषाणि तवात्मजै:।
श्रावितास्ते महात्मान: पाण्डवा: कोपयिष्णुभि:॥ ४६॥
तं भीमसेन: क्रोधाग्निं त्रयोदश समा: स्थितम्।
उद्‍‍गिरंस्तव पुत्राणामन्तं गच्छति पाण्डव:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
आपके पुत्रों ने उन महामनस्वी पाण्डवों को क्रोध दिलाने के लिए जो कठोर शब्द कहे थे, उनके कारण पाण्डवपुत्र भीमसेन के हृदय में तेरह वर्षों से जो क्रोध की अग्नि जल रही है, उसे भीमसेन आपके पुत्रों द्वारा बुझा रहे हैं।
 
Because of the harsh words like 'Shaṇḍha til' (useless til or impotent) etc. that your sons had said to those great-minded Pandavas in order to anger them, the fire of anger that has been burning in the heart of Pandava's son Bhimasena for thirteen years, Bhimasena is putting out the same by putting out your sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)