श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 137: भीमसेन और कर्णका युद्ध तथा दुर्योधनके सात भाइयोंका वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.137.1 
संजय उवाच
भीमसेनस्य राधेय: श्रुत्वा ज्यातलनि:स्वनम्।
नामृष्यत यथा मत्तो गज: प्रतिगजस्वनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! राधानन्दन कर्ण भीमसेन के धनुष की टंकार को उसी प्रकार सहन नहीं कर सका, जैसे मतवाला हाथी अपने विरोधी हाथियों के राजा की गर्जना को सहन नहीं कर सकता।
 
Sanjaya says - O King! Radhanandan Karna could not bear the twirling sound of Bhimasena's bow just as a drunken elephant cannot bear the roaring sound of its opponent, the king of elephants.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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