विक्रमं भुजयोर्वीर्यं धैर्यं च विदितात्मन:।
पुत्रास्तव महाराज दृष्ट्वा विमनसोऽभवन्॥ ४०॥
अनुवाद
महाराज! प्रसिद्ध भीमसेन का पराक्रम, बल और धैर्य देखकर आपके सभी पुत्र दुःखी हो गए॥40॥
Maharaj! Seeing the valour, strength and patience of the renowned Bhimasena, all your sons became sad. ॥ 40॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि भीमयुद्धे षट्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें भीमसेनका युद्धविषयक एक सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३६॥