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mahabharat 7.135.28: तुम युद्ध में लगे हुए महारथियों को व्यर्थ ही शाप दे रहे हो। अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि वहाँ युद्ध किस प्रकार हुआ, कृपया सुनो।॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.135.28 
यत् तु कुत्सयसे योधान् युध्यमानान् महाबलान्।
तत्र ते वर्तयिष्यामि यथा युद्धमवर्तत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तुम युद्ध में लगे हुए महारथियों को व्यर्थ ही शाप दे रहे हो। अब मैं तुम्हें बताता हूँ कि वहाँ युद्ध किस प्रकार हुआ, कृपया सुनो।॥28॥
 
You are cursing the mighty warriors engaged in the war in vain. Now I am telling you how the war took place there, please listen. ॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)