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mahabharat 7.135.27: हे पुरुषोत्तम महाराज! इस दुर्दम्य विष को पीकर स्वयं ही इसका फल भोगो।   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.135.27 
स्वयं पीत्वा महाराज कालकूटं सुदुर्जरम्।
तस्येदानीं फलं कृत्स्नमवाप्नुहि नरोत्तम॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम महाराज! इस दुर्दम्य विष को पीकर स्वयं ही इसका फल भोगो।
 
O best of men! Maharaj! Drink this deadly poison which is very difficult to digest and suffer its consequences yourself. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)