श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.135.25 
संजय उवाच
यस्त्वं शोचसि कौरव्य वर्तमाने महाभये।
त्वमस्य जगतो मूलं विनाशस्य न संशय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- हे कुरुपुत्र! जब तुम्हारे सिर पर यह महान भय आ पड़ा है, तब तुम अब शोक करने बैठे हो, यह उचित नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम ही इस जगत के विनाश के मूल कारण हो॥ 25॥
 
Sanjaya said- O son of Kuru! When this great fear has come upon your head, you are now sitting down to mourn, this is not right. There is no doubt that you are the root cause of the destruction of this world.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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