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mahabharat 7.135.20-21h: युद्ध में भीमसेन द्वारा अपने कवचधारी भाइयों को मारा जाता देखकर मेरे पुत्र को अपने अपराध पर बड़ा पश्चाताप हो रहा होगा।   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.135.20-21h 
दृष्ट्वा भ्रातॄन् हतान् संख्ये भीमसेनेन दंशितान्॥ २०॥
आत्मापराधे सुमहन्नूनं तप्यति पुत्रक:।
 
 
अनुवाद
युद्ध में भीमसेन द्वारा अपने कवचधारी भाइयों को मारा जाता देखकर मेरे पुत्र को अपने अपराध पर बड़ा पश्चाताप हो रहा होगा।
 
Seeing his brothers in armour being killed by Bhimasena in the war, my son must be feeling great remorse for his crime. 20 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)