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mahabharat 7.135.15-16h: मेरे मंदबुद्धि पुत्र मोहित होकर क्रोधपूर्वक भीमसेन की ओर दौड़े थे और पतंगों की भाँति अग्नि में कूद पड़े थे॥15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.135.15-16h 
पतङ्गा इव वह्निं ते प्राविशन्नल्पचेतस:॥ १५॥
ये भीमसेनं संक्रुद्धमन्वधावन् विमोहिता:।
 
 
अनुवाद
मेरे मंदबुद्धि पुत्र मोहित होकर क्रोधपूर्वक भीमसेन की ओर दौड़े थे और पतंगों की भाँति अग्नि में कूद पड़े थे॥15 1/2॥
 
My dull-witted sons, who were fascinated and ran towards Bhimasena in anger, had jumped like kites into the fire. ॥15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)