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mahabharat 7.135.13-14h: संजय! जैसे हाथ में वज्र लिए हुए देवराज इन्द्र के सामने कोई राक्षस नहीं टिक सकता, वैसे ही भीमसेन के सामने कौन टिक सकता है?॥13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 135: धृतराष्ट्रका खेदपूर्वक भीमसेनके बलका वर्णन और अपने पुत्रोंकी निन्दा करना तथा भीमके द्वारा दुर्मर्षण आदि धृतराष्ट्रके पाँच पुत्रोंका वध  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  7.135.13-14h 
को हि संजय भीमस्य स्थातुमुत्सहतेऽग्रत:॥ १३॥
उद्यताशनिहस्तस्य महेन्द्रस्येव दानव:।
 
 
अनुवाद
संजय! जैसे हाथ में वज्र लिए हुए देवराज इन्द्र के सामने कोई राक्षस नहीं टिक सकता, वैसे ही भीमसेन के सामने कौन टिक सकता है?॥13 1/2॥
 
Sanjay! Just as no demon can stand before the King of Gods Indra who has a thunderbolt in his hand, similarly who can stand before Bhimasena?॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)