श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.128.55 
कच्चिद् भीष्मेण नो वैरं शममेकेन यास्यति।
शेषस्य रक्षणार्थं च संधास्यति सुयोधन:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
क्या केवल भीष्म के मारे जाने से हमारा वैर शान्त हो जाएगा? क्या दुर्योधन शेष योद्धाओं की रक्षा के लिए हमसे संधि करेगा?॥ 55॥
 
Will our enmity be appeased by the death of Bhishma alone? Will Duryodhana enter into a treaty with us to protect the remaining warriors?'॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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