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श्लोक 7.128.41  |
दिष्टॺा च कुशली वीर: सात्यकि: सत्यविक्रम:।
दिष्टॺा शृणोमि गर्जन्तौ वासुदेवधनंजयौ॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| यह भी हर्ष की बात है कि वीर सात्यकि सकुशल हैं। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि इस समय भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन की गर्जना सुन पा रहा हूँ ॥ 41॥ |
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| It is also a matter of joy that the brave Satyaki is safe and sound. I am fortunate to be able to hear the roar of Lord Krishna and Arjuna at this time. ॥ 41॥ |
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