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श्लोक 7.128.17  |
यथा हि गोवृषो वर्षं प्रतिगृह्णाति लीलया।
तथा भीमो नरव्याघ्र: शरवर्षं समग्रहीत्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| जिस प्रकार बैल खेल-खेल में वर्षा के वेग को अपने शरीर पर ग्रहण कर लेता है, उसी प्रकार सिंह-पुरुष भीमसेन ने अपने गुरु के बाणों की वर्षा को अपने शरीर पर ग्रहण कर लिया। |
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| Just as a bull playfully absorbs the force of the rain on its body, in the same way the lion-man Bhimasena absorbed the shower of arrows from his teacher on his body. |
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