श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 128: भीमसेनका द्रोणाचार्य और अन्य कौरव योद्धाओंको पराजित करते हुए द्रोणाचार्यके रथको आठ बार फेंक देना तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनके समीप पहुँचकर गर्जना करना तथा युधिष्ठिरका प्रसन्न होकर अनेक प्रकारकी बातें सोचना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.128.1 
संजय उवाच
समुत्तीर्णं रथानीकं पाण्डवं विहसन् रणे।
विवारयिषुराचार्य: शरवर्षैरवाकिरत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! आचार्य द्रोण ने युद्ध में रथ सेना को पार करके आये हुए पाण्डु नन्दन भीमसेन पर हँसते हुए बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी॥1॥
 
Sanjay says- Maharaj! Acharya Drona laughingly started showering arrows on Pandu Nandan Bhimsen, who had come after crossing the chariot army, in the battle. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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