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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 127: भीमसेनका कौरव-सेनामें प्रवेश, द्रोणाचार्यके सारथिसहित रथका चूर्ण कर देना तथा उनके द्वारा धृतराष्ट्रके ग्यारह पुत्रोंका वध, अवशिष्ट पुत्रोंसहित सेनाका पलायन
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श्लोक 50
श्लोक
7.127.50
पिता नस्त्वं गुरुर्बन्धुस्तथा पुत्रास्तु ते वयम्।
इति मन्यामहे सर्वे भवन्तं प्रणता: स्थिता:॥ ५०॥
अनुवाद
‘आप हमारे पिता, गुरु और मित्र हैं तथा हम आपके पुत्र के समान हैं। ऐसा हम सब मानते हैं और सदैव आपके समक्ष आदरपूर्वक खड़े रहते हैं ॥50॥
‘You are our father, teacher and friend and we are like your sons. We all believe this and always stand before you with respect. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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