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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय
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श्लोक 9
श्लोक
7.123.9
तत: क्रुद्धो महाराज माधवस्तस्य संयुगे।
रथं सूतं ध्वजं तं च चक्रेऽदृश्यमजिह्मगै:॥ ९॥
अनुवाद
महाराज! तब मधुवंशी सात्यकि ने युद्धस्थल में क्रोधित होकर अपने बाणों से दु:शासन के रथ, सारथि और ध्वजा को अदृश्य कर दिया।
Maharaj! Then Satyaki of Madhuvanshi clan became angry in the battlefield and made Dushasan's chariot, charioteer and flag invisible with his arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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