vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय
»
श्लोक 35
श्लोक
7.123.35
तमभिद्रुत्य शैनेयो मुहूर्तमिव भारत।
न जघान महाबाहुर्भीमसेनवच: स्मरन्॥ ३५॥
अनुवाद
उस समय महाबाहु सात्यकि ने लगभग दो घंटे तक दु:शासन का पीछा किया; किन्तु भीमसेन के वचनों को स्मरण करके उन्होंने उसे नहीं मारा।
At that time the mighty-armed Satyaki chased Dushasan for about two hours; but remembering Bhimasena's words he did not kill him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×