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mahabharat 7.123.31-32h: इसके बाद महारथी युयुधान ने अत्यन्त क्रोधित होकर उसके चारों घोड़ों को तीखे बाणों से मार डाला और सारथि को भी मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से यमलोक भेज दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.123.31-32h 
ततोऽस्य वाहान् निशितै: शरैर्जघ्ने महारथ:॥ ३१॥
सारथिं च सुसंक्रुद्ध: शरै: संनतपर्वभि:।
 
 
अनुवाद
इसके बाद महारथी युयुधान ने अत्यन्त क्रोधित होकर उसके चारों घोड़ों को तीखे बाणों से मार डाला और सारथि को भी मुड़ी हुई गांठों वाले बाणों से यमलोक भेज दिया।
 
After this, the great charioteer Yuyudhan became very angry and killed all his four horses with sharp arrows. Then he also sent the charioteer to Yamaloka with arrows having bent knots.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)