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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय
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श्लोक 3
श्लोक
7.123.3
तं तु दु:शासन: शूर: सायकैरावृणोद् भृशम्।
रथव्रातेन महता नानादेशोद्भवेन च॥ ३॥
अनुवाद
पराक्रमी दु:शासन ने अनेक देशों से प्राप्त रथों के विशाल बेड़े तथा बाणों की वर्षा से सात्यकि को पूरी तरह घेर लिया।
The valiant Dushasan completely surrounded Satyaki with a huge fleet of chariots obtained from various countries and also with a shower of arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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