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mahabharat 7.123.27-28h: जनेश्वर! तत्पश्चात् आपके पुत्र ने दूसरा धनुष लेकर सिंह के समान गर्जना की और अपने बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया ॥27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.123.27-28h 
अथान्यद् धनुरादाय पुत्रस्तव जनेश्वर॥ २७॥
सात्यकिं च शरैर्विद्‍ध्वा सिंहनादं ननर्द ह।
 
 
अनुवाद
जनेश्वर! तत्पश्चात् आपके पुत्र ने दूसरा धनुष लेकर सिंह के समान गर्जना की और अपने बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया ॥27 1/2॥
 
Janeshwar! Thereafter, your son took another bow and roared like a lion, wounding Satyaki with his arrows. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)