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mahabharat 7.123.26-27h: राजन! उस समय आपके पुत्र का वह भयंकर बल सत्य के कंकणयुक्त तीखे बाणों द्वारा सौ टुकड़ों में छिन्न-भिन्न हो गया। 26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 123: सात्यकिका घोर युद्ध और दु:शासनकी पराजय  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  7.123.26-27h 
तां तु शक्तिं तदा घोरां तव पुत्रस्य सात्यकि:॥ २६॥
चिच्छेद शतधा राजन् निशितै: कङ्कपत्रिभि:।
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय आपके पुत्र का वह भयंकर बल सत्य के कंकणयुक्त तीखे बाणों द्वारा सौ टुकड़ों में छिन्न-भिन्न हो गया। 26 1/2॥
 
Rajan! At that time, that terrible power of your son was broken into a hundred pieces by Satya's sharp arrows studded with pebbles. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)